बिहार की एक भी भाषा नहीं बनी शास्त्रीय भाषा मैथिली हो सकता है शामिल

शास्त्रीय भाषा के रूप में अब तक बिहार की एक भी भाषा को शामिल नहीं किया गया है संविधान की अष्टम सूची में शामिल मिथिला क्षेत्र की भाषा मैथिली शास्त्रीय भाषा का दर्जा प्राप्त करने की सभी निर्धारित शर्तों को पूरा करती है ऐसे में मैथिली को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिलाने के लिए निवेदन समिति के सभापति पूर्व मंत्री स्व बेनीपट्टी विधायक विनोद नारायण झा ने पहल की है बाबत उन्होंने राज्य के शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी से भेंट कर उनसे इस दिशा में आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया है अपने पत्र में पूर्व मंत्री ने शिक्षा मंत्री से एक उच्च स्तरीय समिति का गठन करने की मांग करते हुए कहा कि कमेटी की रिपोर्ट को भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय को अनुशंसा के लिए भेजा जाए कमेटी गठन के लिए उन्होंने कई नामों का सुझाव भी शिक्षा मंत्री को दिया है कहा कि शास्त्रीय भाषा के रूप में अनुसूचित होने के लिए मैथिली भाषा सभी निर्धारित शर्तों को पूरा करती है पूर्व मंत्री ने केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने के लिए जिस उच्च स्तरीय कमेटी के गठन का सुझाव दिया है उसके लिए कई नामों की अनुशंसा भी की है कमेटी में शामिल करने के लिए चाणक्य ला यूनिवर्सिटी के कुलपति न्यायमूर्ति मृदुला मिश्रा सीएम के सलाहकार रिटायर आईएएस अंजनी कुमार सिंह लाना मीवी के पूर्व इतिहास विभाग अध्यक्ष प्रोपराइटर रत्नेश्वर मिश्र भारतीय भाषा संस्थान मैसूर के पूर्व निर्देशक प्रोपराइटर अवधेश मिश्र मैथिली अकैडमी पटना के पूर्व अध्यक्ष प्रोपराइटर महेंद्र नारायण राम चेतना समिति के अध्यक्ष विवेकानंद झा मैथिली साहित्य संस्थान के सचिव भैरव लाल दास मैथिली भक्ति मैथिली शोध पत्रिका के संपादक डॉ शिवकुमार मिश्र नव आरंभ प्रकाशन के संपादक अजीत आजाद एवं सहरसा महाविद्यालय के प्रधानाध्यापक कमल मोहन के नामों का सुझाव दिया है बता दें कि संविधान की अष्टम सूची में शामिल छह भाषाओं को अब तक शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिल चुका है इन्हें तमिल 2004 संस्कृत 2005 कन्नड़ 2008 तेलुगू 2008 मलयालम 2013 एवं उड़ीसा 2014 शामिल है बता दें कि फरवरी 2014 में संस्कृति मंत्रालय ने किसी भाषा को शास्त्रीय घोषित करने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं इसके अनुसार उन भाषाओं को शास्त्रीय घोषित किया जा सकता है जिसके प्रारंभिक ग्रंथों का इतिहास 1500 2000 वर्ष से अधिक पुराना हो साहित्य परंपरा में मौलिकता हो मैथिली भाषा उन सभी शर्तों को पूरा करती है

अपने पत्र में पूर्व मंत्री ने कहा कि शास्त्रीय भाषाओं के लिए केंद्र सरकार ने एक महती परियोजना का शुभारंभ किया है इसके तहत भारतीय भाषा संस्थान मैसूर को डीम्ड विश्वविद्यालय के रूप में विकसित किया जा रहा है इससे उन्हीं भाषाओं का अध्ययन एवं शोध शुरू किया जाएगा जिन्हें शास्त्रीय भाषा का दर्जा प्राप्त हो चुका है वह वर्तमान में बिहार की कोई ऐसी भाषा नहीं है जिससे इस परियोजना का लाभ मिल सके

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